दूसरों की मदद करने की इच्छा
श्री सुभाष गणपत म्हात्रे ने ऑटो-रिक्शा चलाकर आजीविका कमाने से पहले गोदरेज में स्थिर नौकरी की थी। सड़क पर उनका कामकाजी दिन कभी सोलह घंटे तक लंबा होता था। ज़रूरतमंदों के लिए कुछ उपयोगी करने की आशा में उन्होंने बचत की।
इसी इच्छा से समुदाय को व्यावहारिक सहायता देने वाले धर्मार्थ ट्रस्ट की शुरुआत हुई।




